Friday, 28 April 2017

वह देखो माँ आज खिलौनेवाला फिर से आया है।
कई तरह के सुंदर-सुंदर नए खिलौने लाया है।
हरा-हरा तोता पिंजड़े में गेंद एक पैसे वाली
छोटी सी मोटर गाड़ी हैसर-सर-सर चलने वाली।
सीटी भी है कई तरह की कई तरह के सुंदर खेल
चाभी भर देने से भक-भक करती चलने वाली रेल।
गुड़िया भी है बहुत भली-सी पहने कानों में बाली
छोटा-सा 'टी सेट' हैछोटे-छोटे हैं लोटा-थाली।
छोटे-छोटे धनुष-बाण हैं, हैं छोटी-छोटी तलवार
नए खिलौने ले लो भैया ज़ोर-ज़ोर वह रहा पुकार।
मुन्नूौ ने गुड़िया ले ली हैमोहन ने मोटर गाड़ी
मचल-मचल सरला कहती है माँ se लेने को साड़ी
कभी खिलौनेवाला भी माँ क्याख साड़ी ले आता है।
साड़ी तो वह कपड़े वाला कभी-कभी दे जाता है।
अम्मा तुमने तो लाकर के मुझे दे दिए पैसे चार
कौन खिलौने लेता हूँ मैं, तुम भी मन में करो विचार।
तुम सोचोगी मैं ले लूँगा, तोता, बिल्ली, मोटर, रेल
पर माँ, यह मैं कभी लूँगा, ये तो हैं बच्चों के खेल।
मैं तो तलवार ख़रीदूँगा माँ, या मैं लूँगा तीर-कमान
जंगल में जा, किसी ताड़का, को मारुँगा राम समान।
तपसी यज्ञ करेंगे, असुरों- को मैं मार भगाऊँगा
यों ही कुछ दिन करते-करते रामचंद्र मैं बन जाऊँगा।
यही रहूँगा कौशल्याऊ मैं तुमको यही बनाऊँगा
तुम कह दोगी वन जाने को हँसते-हँसते जाऊँगा।
पर माँ, बिना तुम्हाेरे वन में मैं कैसे रह पाऊँगा?
दिन भर घूमूँगा जंगल में लौट कहाँ पर आऊँगा।
किससे लूँगा पैसे, रूठूँगा तो कौन मना लेगा

कौन प्यानर से बिठा गोद में, मनचाही चींजे़ देगा।